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सुधीर मिश्रा ने ‘ब्राउन’ के लिए प्रतिष्ठित फिल्ममेकर राज अमित कुमार से मिलाया हाथ

सुधीर मिश्रा ‘ब्राउन’ के साथ एक एक्ज़ीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर ज़ुड़ने‌ के लिए हामी भर दी है.

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सुधीर मिश्रा और राज अमित कुमार

इंडीपेंडेंट फ़िल्ममेकर के तौर पर अपनी पहचान रखनेवाले और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई अपनी फिल्म ‘अनफ़्रीडम’ (इस फिल्म को भारत में बैन कर दिया गया था) के लिए जाने जानेवाले राज अमित कुमार ने अपनी अगली फ़िल्म ‘ब्राउन’ के लिए मशहूर फ़िल्म निर्माता और निर्देशक सुधीर मिश्रा के साथ हाथ मिलाया है. सुधीर मिश्रा ‘ब्राउन’ के साथ एक एक्ज़ीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर ज़ुड़ने‌ के लिए हामी भर दी है. ‘ब्राउन’ बुट्ट, मोटाना जैसे इलाकों में शूट की गई एक मर्मस्पर्शी फ़िल्म है जिसमें दिखाया गया है कैसे एक बच्ची को शोषण की शिकार होने से बचाने के बाद एक आप्रवासी शख़्स घर लौटने की जद्दोजहद करता है. मगर

ICE (इम्मीग्रेंट्स ऐंड कस्टम्स एन्फ़ोर्समेंट) द्वारा उसे बड़ी बेरहमी से खदेड़ दिया जाता है. राज अमित कुमार ने आप्रवासियों को लेकर समाज में पहले से ही प्रचलित नज़रिये को चुनौती देते हुए इस फ़िल्म में विस्थापित हो चुके शख़्स के पास मौजूद विकल्प और चॉइस को अपने नज़रिये को पेश किया है. हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हमें हमेशा ही बाहरी लोगों का विरोध कर‌ना सिखाया जाता है, ऐसे में फिल्म ब्राउन आप्रवासियों को लेकर होनेवाली सामाजिक बहस को वास्तविकता के धरातल पर पेश करती है.

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सुधीर मिश्रा को हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी, धारावी, चमेली आदि बेहतरीन किस्म की फ़िल्मों के लिए जाना जाता है. ब्राउन के साथ उनके जुड़ाव से फ़िल्म की ओर दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में पूरी मदद मिलेगी. इतना ही नहीं, सुधीर मिश्रा के जुड़ने से अन्य इंडिपेंडेंट फ़िल्ममेकर्स का भी हौसला बढ़ेगा जिससे इंडिपेंडेंट और प्रायोगिक किस्म की फ़िल्मों को और बढ़ावा मिलेगा.

ब्राउन के बारे में अपनी राय रखते हुए राज अमित कुमार कहते हैं, “आज के राजनीतिक माहौल में आप्रवासियों को किसी ख़तरे से कम नहीं समझा जाता है और उन्हें अपराधी की नज़र से देखे जाने की भी प्रवृत्ति का निर्माण हुआ है. उन्हें एक बलात्कारी, बच्चों का यौन शोषण करनेवाला आदि समझा जाता है. ऐसे में मेरे लिए आज के दौर के आप्रवासियों का वास्तविक चित्रण किया जाना और उन्हें इंसान के तौर पर पेश किये जाने‌ की चुनौती को स्वीकार करना बेहद ज़रूरी था. एक फ़िल्ममेकर के तौर पर ब्राउन मेरे लिए मेरे लक्ष्यों का विस्तार है. मेरी फ़िल्म की कहानी आज के हालात के मद्देनज़र आप्रवासियों, ड्रग्स, महामारी और ईमानदारी से जीने की जद्दोजहद में लगे अल्पसंख्यकों से जुड़ी समस्याओं को रेखांकित करने की कोशिश करती है. ब्राउन एक ऐसी सामाजिक जीवन पर‌ कटाक्ष करनेवाली और विचारोत्तेजक फ़िल्म है जो हमें अपनी आसपास की दुनिया की वास्तविकताओं के बारे में सोचने पर‌ मजबूर कर दे.”

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इस फ़िल्म के साथ जुड़ने‌ को लेकर सुधीर मिश्रा कहते हैं, “राज बेहद दिलचस्प किस्म के शख़्स हैं. उनकी फ़िल्म ब्राउन बहुत ही विचारोत्तेजक फ़िल्म है जिसमें एक आप्रवासी, एक बाहरी व्यक्ति की तल्ख़ हक़ीक़तों को  बेहद मार्मिक ढंग से पेश किया गया है. मेरा मानना है कि सिनेमा के माध्यम से ज़िंदगी के इस पहलू को दुनिया के सामने लाना बेहद ज़रूरी है. मेरा मानना है कि ऐसी फ़िल्में बनाई जानी चाहिए जो किसी फ़िल्ममेकर के अंतकरण  से निकलती हों. ऐसे में ये फ़िल्में आगे जाकर उम्दा फ़िल्मों के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब साबित होती हैं. इंडिपेंडेंट फ़िल्ममेकिंग की प्रक्रिया बेहद एकाकी होती है. लेकिन‌ मैं राज जैसे नई पीढ़ी के निर्देशकों को जब इस ट्रेंड से जुड़ा पाता हूं तो मुझे बेहद ख़ुशी का एहसास होता है. इससे अलहदा किस्म के सिनेमा को और अधिक एक्सपोज़र मिलता है.”

राज अमित कुमार ऐसे लोगों के साथ फ़िल्म बनाने में यकीन रखते हैं जो लीक से हटकर बनने वाले सिनेमा को बढ़ावा देते हैं और किसी भी कहानी को बेहद दिलचस्प अंदाज़ में पेश करते हैं. अब ब्राउन से जुड़ी टीम ने फ़िल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के लिए मदद हासिल करने के लिए एक फ़ंड रेज़िंग अभियान की शुरुआत की है.

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