Connect with us

एक्सक्लूसिव

Cricketer Harbhajan Singh launches his YouTube channel Turbanator, ahead of the India-Pakistan World Cup match

Bhajji launches his own YouTube channel Turbanator during the 2019 cricket world cup

Published at

on

Harbhajan-Singh
Harbhajan Singh

This article is also available in: English (English)

Cricketer Harbhajan Singh has been internationally recognized for the past two decades as the off spin maestro. All through his career he has been referred to as the Turbanator. And now on the day of the India and Pakistan’s World Cup match in Manchester, Bhajji is launching his own YouTube channel. And it is appropriately titled Turbanator!

On Turbanator, Bhajji will regularly upload exciting and exclusive videos. As he travels the world, he will be engaging in cricket commentary and analysis. He will also be sharing some great experiences, memories, while having fun. To begin with, the first series to go live is ‘Bhajji ka Doosra.‘ On the show, he will give his opinions on the ongoing world cup matches. He will also be pointing out the players to watch out for! And the best part, he will narrate never heard before stories related to the cricket world too!

Check out Turbanator’s episode no 1 right here:

Also watch Harbhajan Singh’s YouTube channel promo right here:

For those of you who don’t know, the channel is produced by Offspin Media LLP, who are also the publishers of CineBlitz. In the meantime, let us know what you think about Bhajji’s first episode of Turbanator? Share with us your thoughts in the comments section below and stay tuned to CineBlitz.

Continue Reading
Advertisement

एक्सक्लूसिव

बजट नहीं कंटेंट मायने रखता है -राजकुमार राव

Published at

on

This article is also available in: English (English)

अनिल कपूर ने अपने 62वें जन्मदिन के अवसर पर अपनी आगामी फिल्म “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा” का पोस्टर रिलीज़ कर दिया है। इस फिल्म में अनिल पहली बार अपनी बेटी सोनम के साथ अभिनय करते हुए दिखाई देंगे। अनिल और सोनम के अलावा इस फिल्म में राजकुमार राव, रेजिना और जूही चावला भी नजर आएँगी। फिल्म ट्रेलर से दो दिन पहले इसका प्रीव्यू अनिल कपूर के बर्थडे सिलेब्रशन के दौरान लॉन्च किया गया। इस दौरान अनिल, सोनम और राजकुमार एक साथ दिखाई दिए। जहाँ फोटो शूट और केक कटिंग के बाद इन सभी ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया।

इस दौरान राजकुमार राव से एक बेहद रोचक सवाल पूछा गया। उनसे पूछा गया कि राज कम बजट की फ़िल्में इस साल कुछ ज्यादा ही हिट हो रही हैं, कई फ़िल्में ‘बधाई हो’ से लेकर ‘स्त्री जी’ तक। इस सवाल को आधे पर ही रोककर राजकुमार राव ने कहा कि स्त्री जी। मुझे अच्छा लगा कि आप स्त्रियों की रिस्पेक्ट करते हो, यहाँ हर किसी को स्त्रियों की रिस्पेक्ट करनी चाहिए। कम बजट वाले सवाल के जवाब में राव ने कहा कि मुझे लगता है कि बजट का कोई लेना देना नहीं है। कंटेंट मायने रखता है और कंटेंट ही बजट तय करता है। अगर कंटेंट आपका स्ट्रॉन्ग है और ऑडिएंस उससे कनेक्ट कर पा रही है, तो वह फ़िल्म अच्छा करेगी। बजट से कोई लेना देना नहीं रहता। इस पर सोनम ने भी कहा कि अगर कंटेंट अच्छा है तो ही फ़िल्म करनी चाहिए।

राजकुमार राव के अलावा जूही और सोनम से भी सवाल किये गए। जूही ज्यादातर मौकों पर बात को अनिल पर टालती दिखाई दीं। इस बीच सोनम से पूछा गया कि बतौर एक्ट्रेस आपके पिता के सामने किरदार करने को आप किसप्रकार देखती हैं। इसके जवाब में सोनम ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है। हालाँकि मेरे पिता इस रोल को लेकर कुछ डरे हुए जरूर थे। इसपर अनिल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगली बार बताएँगे। बता दें कि शैली चौपड़ा के निर्देशन बननेवाली इस फिल्म का प्रोडक्शन राजकुमार हिरानी और विधु विनोद चौपड़ा कर रहे हैं। फिल्म लव स्टोरी पर आधारित है। इस फिल्म में अनिल कपूर पहली बार सोनम कपूर के साथ अभिनय करेंगे। फिल्म में वह सोनम के पिता की भूमिका निभा रहे हैं।

Continue Reading

इंटरव्यू

बैठ कर रोने से बेहतर है कोशिश कर आगे बढ़ना -सैयमी खेर

Published at

on

This article is also available in: English (English)

सैयमी खेर की डेब्यू फिल्म “मिर्ज्या” भले ही बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास करने में असफल रही, लेकिन सैयमी एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं और वह अपनी जगह बना रही हैं। मराठी फिल्म “माउली” में अपने शानदार अभिनय के बलबूते पर उन्होंने हिंदी फिल्म जगत पर अपनी छाप छोड़ दी है। सिनेब्लिट्ज़ को दिए साक्षात्कार में सैयमी ने अपने फ़िल्मी सफ़र के उतार-चढ़ाव और फिल्मों में मिले कम मौकों से सम्बन्धित वाकयों पर खुलकर बात की।

मिर्ज्या से माउली तक आते-आते 2 साल लग गए। इस दौरान आपको बॉलीवुड में वापसी के लिए क्या-क्या करना पड़ा?

मिर्ज्या के रिलीज़ होने से एक दिन पहले मेरे पास कई फिल्मों के ऑफर आ चुके थे, लेकिन फिल्म के नहीं चलने पर वह ऑफर्स भी चले गए। एक बार जब आपकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कारोबार नहीं कर पाती है, तो आपके लिए आगे की राह मुश्किल हो जाती है। फिल्म फ्लॉप होने के बाद स्ट्रगल शुरू हुआ। मिर्ज्या के बाद भी मुझे काफी फिल्म ऑफर हुई, लेकिन वह मेरे करने लायक नहीं थी। इसलिए मैं एक बेहतर मौके का इन्तेजार कर रही थी। मैंने मनी रत्नम के साथ एक साउथ फिल्म साइन की थी, जिसमें मैंने बहुत हार्ड वर्क भी किया, लेकिन उसका कुछ ख़ास नतीजा नहीं निकल सका। इसके बाद मुझे दो मराठी फिल्म ऑफर की गई, लेकिन उसमें मुझे वेस्टर्न गर्ल की भूमिका निभाने के लिए कहा गया। मुझे ऐसी फिल्म चाहिए थी, जिसमें मेरा किरदार अच्छा हो। माउली में मेरा किरदार एक भारतीय नारी का था, जो कि मुझे बहुत भाया। मुझे गर्व महसूस होता है कि फिल्म के प्रोडूसर और एक्टर रितेश देशमुख ने इस फिल्म में मुझे मौका दिया। माउली एक बड़ी फिल्म थी और रितेश की लय भारी के बाद दूसरी हिट फिल्म थी। इस फिल्म में अजय-अतुल ने संगीत दिया था और आदित्य सरपोतदार इस फिल्म के निर्देशक थे। इसलिए फिल्म को ना कहने का मेरे पास कोई कारण नहीं था।

आपने कहा कि सही फिल्म चुनने के लिए आपने समय लिया। आपने कैसे चुना? क्या आपको अच्छी स्क्रिप्ट नहीं मिल रही थी?

नहीं, अच्छी स्क्रिप्ट की कमी नहीं थी। पिछली कुछ फिल्मों को देखा जाए, तो कंटेंट बधाई हो और अन्धाधुन जैसे आ रहे थे। इस दौरान कुछ अच्छी स्क्रिप्ट्स आती हैं, तो फिर उसपर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। सबसे पहले किसी फिल्म के लिए 15 ए-लिस्ट अभिनेत्रियों में से किसी एक को चुनने की कोशिश की जाती है, अगर उनमें से नहीं मिली, तो फिर बी-लिस्ट की ओर ध्यान दिया जाता है। अगर वहां से भी बात नहीं बनी, तो फिर निर्देशक किसी फिल्म स्टार के बच्चे को लॉन्च करने की सोचते हैं। अगर किसी स्टार चेहरे को नहीं, तो फिर किसी फ्रेश चेहरे को लॉन्च कर दिया जाता है। लेकिन कोई प्रोडूसर ऐसे अभिनेत्री को नहीं लेगा, जिसकी पहली फिल्म फ्लॉप हुई हो। हालाँकि आप हाथ पर हाथ धरे बैठ नहीं सकते, आपको आगे बढ़ना होगा। ऐसी स्क्रिप्ट चुनना मुश्किल होता है, जिसपर आप काम करना चाहते हो। मैं अन्धाधुन का हिस्सा बनना चाहती थी, लेकिन किसी कारणवश ऐसा हो नहीं पाया। मुझे इस दौरान कुछ सेक्स कॉमेडी फ़िल्में भी ऑफर की गई, लेकिन वह मैं नहीं करना चाहती थी। इसके बजाय मैं थिएटर क्लास और वर्कशॉप करने लगी। अच्छी स्क्रिप्ट की कमी नहीं थी, बस अच्छे मौके की कमी थी। ऐसे कई लोग हैं जो ऐसा ही सोचते हैं।

आप पारिवारिक भी हो, इसलिए यह सब आपके लिए उतना आसान नहीं हुआ होगा, इसपर आप क्या सोचती हैं?

हम नाशिक में एक छोटे से गाँव में रहते हैं। जहाँ मेरे माता-पिता ने मेरी बहन और मुझे लाया था, क्योंकि वह चाहते थे कि हम फ़िल्मी दुनिया से दूर रह सके। वह बॉलीवुड के बारे में बेहद गलत सोचते थे। लेकिन जिन्दगी ने पलटवार किया और मैं बॉलीवुड में आ गई। मेरा फ़िल्मी कनेक्शन जुड़ा, क्योंकि मेरी आंटी तन्वी आज़मी इस इंडस्ट्री में पहले से थीं। अगर मराठी फिल्म इंडस्ट्री में आने की बात की जाये, तो यहाँ मेरी दादी उषा किरण का बहुत नाम रहा है। यहाँ नाम को लेकर कोई तनाव नहीं था। उनके नक़्शे कदम पर चलते हुए मुझे यह आभास हुआ कि अभी सफर बहुत लम्बा है। इसके बाद मैंने आगे बढने के लिए कुछ ब्रांड्स के लिए ऑडिशन दिए।

आप डिजिटल स्पेस का भी हिस्सा बनने जा रही हैं, जो कि आप को और ऊँचाइयों पर ले जाएगा। आपका ओटीटी के बारे में क्या ख्याल है, क्या आप भी इसे फोलो करती हैं?

मैंने कुछ डिजिटल शो देखना शुरू किया है। हालाँकि मैंने कुछ शो को लेट देखना शुरू किया है। मैंने नार्कोस, ब्रेकिंग बैड और स्केयर्ड गेम्स देखा है, जिसके कंटेंट मुझे मजेदार लगे। वेब सीरीज और ओटीटी के बारे में मेरा मानना है कि यहाँ लोगों को यह चुनने की आजादी होती है कि वह क्या देखें और क्या नहीं। हम कभी भी कहीं भी किसी भी शो को देख सकते हैं, शायद इसलिए यह अच्छा भी है। पिछले दो सालों में यह उभर कर सामने आया है। हर कोई अब इसके साथ जाना चाहता है। आंकड़ों को देखा जाए, तो भारत में नेटफ्लिक्स को यूज करने वालों की संख्या केवल 2 प्रतिशत है। अगर रिच कैटेगरी को छोड़ दिया जाए, तो लोअर केटेगरी तक पहुँचने के लिए इसे काफी समय लग सकता है। अंगद बेदी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं और वेब पर कितने शो करते रहते हैं। उन्होंने कहा था कि वेब पर कई ऐसे कंटेंट आ रहे हैं, जिसे करना आसान नहीं है।

बॉलीवुड इंडस्ट्री में ऐसे कौन लोग हैं, जिससे आप एडवाइस लेती हैं?

राकेश(ओम प्रकाश मेहरा) सर। पिछले 3 सालों से वह मेरे लिए एक पारिवारिक सदस्य के रूप में हैं। उन्हें हम न केवल व्यवहारिक तौर पर, बल्कि मेंटर के तौर पर भी देखते हैं। जब भी मुझे कोई फिल्म या कुछ और ऑफर किया जाता है, तो मैं उनसे ज़रूर फीडबैक लेती हूँ। उनके विचार मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं।

क्या बॉलीवुड में पैर ज़माने के लिए एक गॉडफादर की ज़रूरत होती है?

बॉलीवुड इंडस्ट्री में कुछ लोग इसप्रकार से ऊपर जरूर उठे हैं। यह इंडस्ट्री में पैर ज़माने का एक तरीका ज़रूर है, लेकिन यहाँ ऐसे भी कुछ लोग हैं, जो खुद की मेहनत से उभरकर सामने आये हैं और अपना नाम बनाया है। आप आयुष्मान खुराना और विकी कौशल को इसके उदाहरण के तौर पर देख सकते हैं।

Continue Reading

इंटरव्यू

जीवन मात्र कल्पना नहीं है -यूलिया वंतूर

Published at

on

This article is also available in: English (English)

रोमानियन ब्यूटी यूलिया वंतूर का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। बावजूद इसके उनके चेहरे पर हल्की सी एक मुस्कान और इसके साथ हमेशा उनका सकारात्मक रवैया उन्हें बाकियों से अलग बनाता है। यूलिया के साथ यह साक्षात्कार उनके असल स्वरूप को प्रदर्शित करता है। यूलिया बॉलीवुड में अपने पदार्पण को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। इससे पहले उनके जीवन में क्या कुछ घटता रहा है, उसे यूलिया ने इस साक्षात्कार के ज़रिये हमारे बीच शेयर किया है।

प्रतिभा की खोज, होस्टिंग कौशल, फिर भारत यात्रा और अब बॉलीवुड में अभिनय। इस बीच आपकी सबसे अच्छी यादें क्या रहीं?

पहली याद मेरे बचपन की है, जब सर्दियों में अपने पिता के साथ मैं स्कीइंग करती थी और फिर उसके बाद दिनभर अपने दोस्तों के साथ खेला करती थी। वह बचपन की खुबसूरत यादें कभी भुलाई नहीं जा सकती हैं। मुझे चुनौतियाँ पसंद हैं और शायद मैं उसी के कारण यहाँ तक पहुँच पाई हूँ। मुझे लगता है कि लाइफ एक सफ़र की तरह है और हमें इसे इसी तरह जीना भी चाहिए। मेरी लाइफ में सबकुछ अचानक ही हुआ है। मुझे न्यूज़ एंकर बन्ने का अवसर मिला, लेकिन वह मैंने सोचा नहीं था। इसीप्रकार मेरे इस सफ़र की शुरुआत हुई, मैं टीवी होस्ट बनी, कुछ शो किया और फिर 8 वर्षों तक इसी तरह चलता रहा। मुझे पता था कि हर चीज का एक सही समय होता है और उस वक़्त आपको तैयार रहना ज़रूरी है। मैं हमेशा ऐसी चुनौतियों के लिए तैयार थी।

बचपन में आप क्या बनना चाहती थी?

बच्चे जिसप्रकार के गेम्स खेलते हैं, वह मैने कभी नहीं खेला। डांस करना मुझे पसंद था। बचपन से ही मैं बैले डांस सीखना चाहती थी। मैं अक्सर अकेले अपने रूम में प्रैक्टिस करती थी। अब मैं फिर उसे सीखना चाहती हूँ। मैं अपनी डेब्युट फिल्म की शूटिंग खत्म करने के बाद इसे वापस सीखूंगी।

क्या अब आपके सपने में कोई बदलाव आया है?

मैं अपने करियर के सही पड़ाव पर पहुँच चुकी हूँ और फ़िलहाल मेरी कोई बड़ी चाहत नहीं है। लेकिन मैं आगे बढ़ते हुए अच्छी चीजें भी करती रहूंगी। फ़िलहाल परिवार ही मेरी महत्त्वाकांक्षा है और मैं एक होना चाहती हूँ।

क्या आपने सेटल होने का कोई समय तय किया है?

ऐसा लक्ष्य तय करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि यह सब भगवान की मर्जी है। बड़े होते समय हम कल्पना करते हैं कि एक समय आने पर हमारी शादी होगी, लेकिन जीवन मात्र कल्पना नहीं है, इसमें कई बार रोचक घटनाएँ भी घटती रहती हैं। इस दौरान आपको किसी साथी की ज़रूरत होती है, जिससे आप सब कुछ कह सकें। लेकिन जबतक आप साथ
रहते हो, तब तक सब अच्छा चलता है। कुछ जिम्मेदारियां आने के बाद दो लोगों के बीच समस्याएँ बढ़ जाती हैं।

आज आप जो कुछ भी हो, उसका श्रेय किसे देती हो?

सबसे पहले भगवान को, जिन्होंने मेरे लिए सब प्लान करके रखा था। दूसरी मेरी एक्टिंग टीचर, जिन्होंने मुझे एक शो में ऑडिशन देने के लिए कहा था। उस वक़्त मुझे नहीं पता था, जाना चाहिए या नहीं, लेकिन मुझे आगे ले जाने वाली वह एक थीं, उन्ही की वजह से मैं आज यहाँ हूँ। हर जगह मुझे किसी न किसी महिला का साथ मिला, जिसने मेरी बहुत मदद की।

आपने हिंदी सीखनी कब शुरू की और हिंदी गीत गाने का प्लान कब किया? पहले आपकी बॉलीवुड म्यूजिक को लेकर क्या राय थी और अब उसमें कितना बदलाव आया है?

पहली लाइन जो मैंने हिंदी में सीखी, वह थी, ‘तू मेरा दोस्त है।’ यह बॉबी देवोल की फिल्म नन्हे जैसलमेर का डायलॉग था। फिर उसके बाद नमस्ते, शुक्रिया और बाकि चीजें सीखी। मैंने अपने आस-पास हो रही सभी चीजों से सीखना शुरू किया। बचपन में कभी-कभी राजकपूर की फ़िल्में देखने को मिल जाती थीं, फिर उसके बाद रोमानिया में हिंदी फ़िल्में आना बेहद कम हो गई। हालाँकि अब फिरसे वहां हिंदी फ़िल्में शुरू हो चुकी हैं। क्योंकि अब कुछ भी मुझसे सम्बन्धित आती है, तो वहां भी खूब चलती है। जैसे सलमान ने कुछ किया और यूलिया ने कुछ किया, ऐसी खबरें वहां खूब दिखाई जाती हैं।

आपके नजर में बेस्ट बॉलीवुड सिंगर कौन है, जिसे आप भी सुनती हैं?

मुझे लगता है ए.आर. रहमान का म्यूजिक सबसे बेस्ट है। लता मंगेशकर की आवाज मुझे बहुत पसंद है। मेरा पसंदीदा गीत ‘लग जा गले’ है, जिसे लता जी ने अपनी सुरीली आवाज दी है। नए जनरेशन में सोनू निगम, श्रेया घोसाल, पलक मुच्चल भी बेहतरीन सिंगर हैं।

अफवाहों और सोशल मीडिया ट्रोल्स का सामना आप कैसे करती हैं? आप अबतक इससे अवगत हो चुकी होंगी?

जीवन में कुछ चीजें अच्छी सोच से शुरू होती हैं, लेकिन लोग इसे गलत साबित करने से बाज नहीं आते। लोग गलत दिशा में चले जाते हैं। सोशल मीडिया गलत विचारों को फ़ैलाने के लिए नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग छुपकर किसी के बारे में भला बुरा कह सकते हैं, लेकिन इसमें भी वह खुदका ही नुकसान करते हैं। किसी का तुम्हारी बातों से कुछ नुकसान नहीं होगा, लेकिन आपकी सोच ज़रूर गलत हो जायेगी। मैं ऐसा नहीं कहती कि हर कोई किसी को लाइक करता है, लेकिन कुछ कहने का एक तरीका होता है। सोशल मीडिया का यह एक नकारात्मक हिस्सा है, जिसे बॉलीवुड में भी लोग गलत मानते हैं। सोशल मीडिया में जहाँ एक ओर नकारात्मक चीजें हैं, वहीँ दूसरी ओर यह अच्छी चीज भी है। यहाँ से हम किसी के बारे में भी कोई जानकारी निकाल सकते हैं और पूरे विश्व से आसानी से जुड़ सकते हैं।

‘मी टू’ मूवमेंट के चलते बॉलीवुड के कुछ शर्मनाक वाकये सभी के सामने खुलकर आ रहे हैं, इस इंडस्ट्री में एक न्यूकमर के तौर पर क्या यह आपके लिए कुछ डरावना नहीं है?

मैं एक सशक्त महिला हूँ और मैं किसीको मेरे साथ इस प्रकार के गलत व्यवहार की अनुमति नहीं दूंगी। अगर मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता, तो इसपर रियेक्ट करना मुझे आता है। बदकिस्मती से ऐसी कई महिलाएं हैं, जो हिम्मत नहीं जुटा पाती हैं और ऐसी परिस्थिति में वह ‘ना’ नहीं कह पाती हैं। ऐसा कुछ होना बहुत ही गलत है। हालाँकि ऐसी चीजें काफी अरसे से हो रही हैं, लोग अब बोलना शुरू किये हैं। केवल महिलायें ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी इसके खिलाफ बोलना चाहिए और हमारी इंडस्ट्री से इस चीज का खात्मा करना चाहिए। जब आप इसकी बातें करते हो, तो आपको पता होना चाहिए कि मी टू मूवमेंट क्या है। यह यौन हिंसा के खिलाफ एक मुहीम है। जब कोई व्यक्ति अपनी पोजीशन का फायदा उठाकर किसी की लाचारी का फायदा उठाता है, तब ऐसे वाकये होते हैं। हम सभी को साथ आकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए।

अगर आपके जीवन पर कोई किताब लिखी जाती है, तो उसका शीर्षक क्या होना चाहिए और क्यों?

अबतक मेरा सफ़र इतना नहीं रहा है कि मुझपर किताब लिखी जाए। मुझे लगता है कि यहाँ तक पहुँचने के लिए एक लंबा सफ़र तय करना होगा।

अगर आप इसमें सेटल हो जाती हैं, तो क्या आप एक्टिंग और सिंगिंग को कंटिन्यू करोगी?

मुझे लगता है कि सिंगिंग आप पूरी लाइफ कर सकते हैं, इसकी यही खूबसूरती है। एक औरत ऐसी चीजें कर सकती है, जिन चीजों से उसका भावनात्मक रुख जुड़ा हुआ हो। आपको अपने बच्चों के लिए एक आदर्श भी बनना होता है। मुझे लगता है कि माँ बनना एक औरत के लिए सबसे मुश्किल होता है। मैं उन सभी औरतों की रिस्पेक्ट करती हूँ जो माँ हैं।

अगर आप माँ बनती हो, तो ऐसी कौनसी तीन क्वालिटी है, जो आप चाहोगी कि आपके बच्चे में हो?

सबसे पहला ईमानदारी, दूसरा अपने जीवन के प्रति जिम्मेदार हो और आखिरी अपने लाइफ को खुल कर जिए।

शो होस्टिंग, रैंप, सिंगिंग और एक्टिंग के बाद अब क्या वह चीज है जो हम भविष्य में देखेंगे?

मुझे सच में नहीं मालूम कि भविष्य ने मेरे लिए क्या संभालकर रखा है, लेकिन मैं उन सभी चीजों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ।

Continue Reading

Trending

>