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न्यूज़ और गॉसिप

हिंदी सिनेमा के मशहूर कलाकार और लेखक कादर खान की एक झलक

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भारतीय फिल्म जगत के मशहूर कलाकार, लेखक कादर खान अब इस दुनिया में नहीं रहें। कादर खान एक ऐसे कलाकार रहें जिंन्होनें अभी तक 300 से अधिक फिल्मों में अपना योगदान दे चुके हैं। कादर खान का निधन  कनाडा में 31 दिसम्बर 2018 को शाम करीब 6 बजे हुआ यूँ कहें की फिल्मों के ज़रिये लोगों को हसाने और रुलानें वाला यह किरदार दुनिया छोड़ चला।  कादर खान बॉलीवुड में एक कॉमेडी कलाकार के रूप में सुमार थे।
कादर खान का व्यक्तिगत जीवन 
कादर खान का  11  दिसम्बर 1937  को  अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था इनके पिता अब्दुल कादर और माता इक़बाल बेगम की ये चौथी संतान थे। इनके जीवन के एक साल बाद इनका पूरा परिवार अफगानिस्तान से भारत के मुंबई सहर आ गया था। परिवार के लोग मुंबई में मसहूर झुग्गी-झोपड़ियों में अपना जीवन यापन करते थे।  कादर खान मूलतः मुंबई में रहते हैं। कादर खान की शादी अजारा खान से हुई उनके तीन बेटें हैं। जिसमें से एक तो कनाडा में रहतें हैं। उनका एक बेटा सरफराज खान हिंदी फिल्म अभिनेता हैं ।
शिक्षा:-
इस महान कलाकार के परिवार की स्थिति सही न होनें के कारण उन्होंने अपनी  प्रार्थमिक शिक्षा मुंबई के सरकारी स्कूलों में अर्जित किया। इंजीनियर बननें के सौक ने उन्हें स्माइल युसूफ कॉलेज में दाखिका लेनें में मजबूर कर दिया किसे पता था की यह गरीब छात्र  एक दिन अपनें हुनर से आसमान की बुलंदियों तक अपनी पहचान बना लेगा। सफ़र यहीं नहीं ख़त्म होता अपनी पढाई पूरी करनें के बाद कादर खान बतौर प्रोफेसर साहू सिद्दीक कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में बतौर प्रोफेसर नियुक्त किया गया यहाँ से कादर खान की पहचान प्रोफसर कादर खान के रूप हो होने लगी जिंदगी के बुरे वक्त में  यह एक ऐसा सफ़र था जहाँ जीवन को जीनें के लिए उम्मीद की एक किरण दिखी।
एक प्रोफेसर से कलाकार बनानें की अद्भुत कहानीं :-

अफगानिस्तान के काबुल में जन्म, पिता कंधार के और बतौर अभिनेता करियर की शुरुआत 1963 में फिल्म “दाग” राजेश खन्ना के साथ किया, पहचान यह थी की कहानी कोई भी लिखे पर उसमें  डायलॉग खुद का ही होता था।

कहते है जब किस्मत रंग लाती है तो कुछ भी होना असंभव नहीं होता है, कभी – कभी ऐसा भी होता है जब कुछ न सोचें हुए भी बहुत कुछ मिलनें लगता है ठीक ऐसा ही हुआ सुपर स्टार कादर खान उस दौर में जब दिलीप कुमार साहब फिल्मों के मशहूर कलाकार हुआ करते थे तक कादर खान अपने भविष्य को एक किनारे ले जानें लगे थे, कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान कादर खान ने अपने एक नाटक में भाग लेनें का मन बनाया यह लोगों में इतना प्रचलित हुआ की उस वक्त के मशहूर सितारे दिलीप कुमार खुद को न रोक सके और वे उस नाटक में कादर खान के किरदार से प्रभावित दिलीप कुमार साहब उनसे मिले और बात यही नहीं रुकी उन्होने अपने आगामी फिल्म “सगीना महतो और बैराग” के लिए उनको साईन कर लिया। यह कादर खान और उनके परिवार के लिए बड़े गर्व की बात थी।

कादर खान की मशहूर फ़िल्में:-

जिंदगी की ज़द्दो जहद से परेशान कादर खान को फिल्मों में बहुत सारी अटकलों का सामना करना पड़ा। कहते है सोना जितना घिसता है उतना ही चमक दिखता है, ठीक इसी तरह मशहूर लेखक और कलाकार कादर खान की कहानी थी।

कादर खान की कुछ मशहूर फिल्में है जिनसे हम आप को रुबरु करते हैं।

1989 नसीब :

कलाकार –

कादर खान के साथ अमिताभ बच्चन , हेमा मालिनी और ऋषि कपूर मुख्य किरदार में थे।

1982 सत्ते पे सत्ता:

कलाकार –

अमिताभ बच्चन, शक्ति कपूर और हेमा मालिनी के साथ वापसी किया।

1984  चार फ़िल्में :

अंदर-बाहर, कैदी, मकसद , तोहफा और अकल्मन्द जैसी फिल्म इस मशहूर कलाकार को और भी मशहूर बना दिया ये फ़िल्में इनके लिए मील का पत्थर साबित हुई जो इनके फिल्मीं कैरियर को और भी ऊचा उठाने का काम किया हैं।

1986  में लगातार छः फ़िल्में :

फिल्म इंसाफ आवाज, दोस्ती-दुश्मनी, घर संसार, धर्म अधिकार, सुहागन और शोला जैसी फ़िल्में पर्दे पर देखने को मिली जो दर्शकों में खूब चर्चित रही और कादर खान का किरदार लोगों को खूब राश आया।

1988  :

बीवी हो तो ऐसी, इंतकाम, साजिश, वक्त की आवाज, घर-घर की कहानी, कब तक चुप रहूंगी, दरिया दिल, प्यार मोहब्बत और सोने पे सुहागा जैसी हिट फ़िल्में पर्दे पर देखने को मिली जहाँ कादर खान का किरदार काफी सराहनीय रहा है।

1990 :

जवानी ज़िंदाबाद, मुकद्दर का बादशाह, घर हो तो ऐसा, किशन कन्हैया, बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी 1999 में हम, इंद्रजीत, कर्ज चुकाना है, खून का कर्ज, प्यार का देवता जैसी फ़िल्में दर्शको को देखने को मिला।

1994 :

मिस्टर आज़ाद , घर की इज़्ज़त , मैं खिलाडी तूं अनाड़ी, आज ,साजन का घर, राजा बाबू और 1995 कुली नंबर1 तकदीर वाला, द डॉन, मैदान ए जंग, सुरक्षा जैसी फिल्मों में अभिनय किया।

1995 :

साजन चले ससुराल, जंगबाज़, छोटे सरकार, सरूर, माहिर, बंदिश और 1997 मिस्टर एन्ड मिसेज खिलाडी, सनम, जुदाई, राजाबाबू जैसी हिट फिल्मों के बादशाह रहे।

1998  :

हीरो हिंदुस्तानी, कुदरत, बड़े मिया छोटे मिया, घर वाली बाहर वाली, आंटी नंबर 1 मेरे दो अनमोल रतन और 2000 में तेरा जादू चल गया, धड़कन जोरू  का गुलाम,आप जैसा कोई नहीं फ़िल्में थी।

2001-2002 :

इत्तेफाक, अखियों से गोली मारे, बधाई हो बधाई, हाँ मैंने भी प्यार किया है, चलो इश्क लड़ाए जैसी फ़िल्में देखने को मिली।

2016:

अमन के फरिस्ते इस वर्ष कादर खान की फिल्म रही है।

ये तो सत्य है की इनके इतने लम्बे सफर को प्रदर्शित करना संभव नहीं माना जा सकता है लेकिन इन महान कलाकार की कुछ छवियाँ आप के सामने प्रस्तुत की गयी है।

कादर खान: –

देखो चारों तरफ देखो । इनमें भी कोई किसी की मां । कोई किसी की बहन है । कोई किसी का भाई है । पर शबो गम में मिट्टी के नीचे सभी दबे पड़े हैं । मौत पर किसकी रिश्तेदारी है, आज इनकी तो कल हमारी बारी है।

बेटे इस फकीर की एक बात याद रखना, जिन्दगी का अगर सही लुत्फ उठाना है तो मौत से खेलो। सुख में हंसते हो तो दुख में कहकहे लगाओ । जिन्दगी का अंदाज बदल जायेगा ।

जिन्दा हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं, मुर्दों से बदतर हैं वो लोग जो मौत से घबराते हैं।

सुख को ठोकर मार, दुख को अपना । अरे सुख तो बेवफा है, चंद दिनों के लिये आता है और चला जाता है । पर दुख तो अपना साथी है , अपने साथ रहता है ।

पोंछ ले आंसू पोंछ ले आसूं । दुख को अपना ले । तकदीर तेरे कदमों में होगी , तू मुकद्दर का बादशाह होगा …….

और इस लंबे डायलाग के बाद स्क्रीन पर अमिताभ की एन्ट्री होती है जहां वह गीत बजता है। रोते हुये आते हैं सब ..हंसता हुआ जो जायेगा ….वो मुकद्दर का सिंकदर कहलायेगा ।

उस दौर में शोले और बाबी के बाद सबसे कमाई वाली फिल्म मुकद्दर का सिकंदर ही रही । और सोवियत संघ में जब इस फिल्म ने धूम मचायी तो रुसी कादर खान के डायलाग ही ज्यादा बोलते सुनाई दिये ।

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