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कारगिल युद्ध की 20वीं वर्षगाठ पर कुछ देशभक्ति फ़िल्में

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 के मई और जुलाई के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए संघर्ष का नाम है।

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कारगिल युद्ध जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 के मई और जुलाई के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए संघर्ष का नाम है। पाकिस्तान की सेना और कश्मीरी उग्रवादियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की थी। पाकिस्तान ने दावा किया कि लड़नेवाले सभी कश्मीरी उग्रवादी हैं, लेकिन युद्ध में बरामद हुए दस्तावेज़ों और पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से साबित हुआ कि पाकिस्तान की सेना प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल थी। लगभग 30,000 भारतीय सैनिक और 5,000 घुसपैठिए इस युद्ध में शामिल थे। भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे अंतरार्ष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को सीमा पर जाने को मज़बूर किया।

कारगिल युद्ध पर आधारित बॉलीवुड ने कुछ अच्छी फिल्मों का निर्माण किया है, जो कारगिल की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। आज हम ऐसी ही कुछ अच्छी फिल्मों के बारे में आपको बताने की कोशिश करते हैं।

1. एलओसी (LOC)

इस फिल्म को जे पी दत्ता ने निर्देशित किया था। इस फिल्म में कुछ ऐसे किरदारों को जगह दी गयी थी,जो वास्तव में कबीले तारीफ माना जा सकता है। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अयूब खान, अभिषेक बच्चन और सैफ अली खान को देखा गया था। जीपी दत्ता की यह फिल्म 12 दिसम्बर 2003 को देश के सभी सिनेमा घरों में दस्तक दी थी। इस देश भक्ति की फिल्म को लोगों ने खूब पसंद भी किया था।

2. लक्ष्य (Lakshya)

लक्ष्य,२००४ में बनी फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित बॉलीवुड फिल्म है। इसके अभिनेता ऋतिक रोशन, प्रीति ज़िंटा , अमिताभ बच्चन, ओम पुरी और बोमन ईरानी है। ऋतिक रोशन लेफ्टिनेंट करण शेरगिल (बाद में कार्यवाहक कप्तान) की भूमिका में है, जो अपनी टीम का नेतृत्व (प्रारंभ में 12 सदस्य और बाद में 6) कर आतंकवादियों पर जीत पाते हैं। यह 1999 के कारगिल युद्ध के संघर्ष की ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है।

3. टैंगो चार्ली (Tango Charlie)

टैंगो चार्ली वर्ष 2005 में बनी, युद्ध पर आधारित फ़िल्म है जिसका लेखन एवं निर्देशन मणि शंकर ने किया है। फ़िल्म में कई अदाकर जैसे अजय देवगन, बॉबी देओल, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और सुदेश बैरी आदि शामिल है। फ़िल्म का सार तरुण चौहान नामक अर्द्धसैनिक दाल के भारतीय सिमा सुरक्षा बल में बतौर नव नियुक्त सिपाही के तथाकथित युद्ध में कठोर अनुभवों पर केंद्रित है। फ़िल्म में प्रस्तुत किया गया है कि सच्चे सिपाही जन्म नहीं लेते, बस बन जाते हैं।

फ़िल्म में भारत के विभिन्न भागों में पनपते आंतरिक द्रोह को दिखाया गया है, तथा बीबीसी पत्रकार जसप्रीत पांडोहर के वर्णन में यह “भारत में फैली आतंकवादी हिंसा और उनसे जुझते लोगों की वीरता को जानने का नया रुचिकर अध्याय खोलती है। “अंग्रेजी अखबार द हिन्दू ने फ़िल्म के विषय में लिखते है: “इस कठोर विषय का सामना करने के लिए पर्याप्त साहस की जरूरत है” तथा “यह एक साहसिक कदम है जहाँ भारतीय पत्रकारिता जाने से बचती है।”

 

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