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न्यूज़ और गॉसिप

बॉम्बे हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को अरशद वारसी का सलाम

अगर यह बात सही है, तो एक लंबे समय के बाद एक बेहतर कानून पास हुआ -अरशद वारसी

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भारत देश में अदालत के निर्णयों पर अक्सर सवालिया निशान उठते रहे हैं। हालाँकि उम्मीदें कभी नहीं मरती, जनता की आँखें अदालत के फैसले पर आज भी टिकी रहती हैं। अदालती फैसले किसी की ऑंखें नम कर जाते हैं, तो किसी के होंठों पर मुस्कान बिखेर जाते हैं। मुंबई उच्च न्यायालय का एक ऐसा ही फैसला सामने आया है, जिसकी हर कोई तारीफें करते नहीं थक रहा है। यह फैसला बुजुर्गों के सम्मान और उनके हक़ में सुनाया गया है। इस फैसले पर बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अरशद वारसी ने भी मुंबई उच्च न्यायालय को सलाम ठोंका है।

दरअसल मुंबई उच्च न्यायालय के दो जजों ने एक बुजुर्ग के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। मामला अँधेरी में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति का है, जिन्हे उनके बेटे और बहू ने उन्ही के घर से बेदखल कर दिया। घर से बेदखल होने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहाँ उनकी बात न केवल सुनी गई, बल्कि सच्चाई और इंसानियत के हक़ में फैसला भी सुनाया गया। बेटे के नाम पर लिखी गई जायदात को पुन: उस बुजुर्ग व्यक्ति को लौटाया गया। कोर्ट ने अपने स्टेटमेंट में कहा, “बेटे और बहू के कहने पर बुजुर्ग व्यक्ति ने अँधेरी स्थित अपने फ़्लैट का 50 प्रतिशत शेयर अपने बेटे के नाम पर कर दिया था। लेकिन प्रॉपर्टी नाम पर लिखे जाने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति और उसकी दूसरी पत्नी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा, जिसके चलते बुजुर्ग व्यक्ति ने एक याचिका दाखिल की, जिसमें गिफ्ट वापस लेने की मांग की गई और हमें इस गिफ्ट को कैंसिल करने में कुछ गलत नहीं लगा।”

क्या कहता है कानून

वर्तमान परिस्थिति में बुजुर्गों को विभिन्न प्रकार की आधारभूत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संतान होने के बाद भी बुजुर्गों को बेसहारा सड़कों पर छोड़ दिया जाना किसी संगीन अपराध से कम नहीं है। इस प्रकार के मामले को बढ़ता देख भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 41 का पालन करते हुए वर्ष 2007 में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम कानून बनाया। इस कानून के तहत अगर माता-पिता अपनी जायदात अपने बच्चे या किसी रिश्तेदार को भेंट स्वरुप उसके नाम करते हैं, तो उस व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है कि वह उन बुजुर्गों का पूरा ख्याल रखे। इस कानून के कुछअहम पहलुओं पर एक नज़र:

– 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक इस भरण-पोषण अधिनियम के हक़दार हैं।
– वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह स्पेशल अधिनियम 10,000 रुपये तक की मेंटेनेंस मुहैया करवाता है।
– बच्चे द्वारा बुजुर्ग माता-पिता का ख्याल न रखना एक क़ानूनी अपराध है।
– अगर जिम्मेदार व्यक्ति बुजुर्ग का ख्याल नहीं रखते हैं, और वह दोषी पाया जाता है, तो उसे 3 महीनों की जेल हो सकती है और मुआवजा भी देना पड़ सकता है।
-निसंतान माता-पिता भी इस अधिनयम के तहत अपने किसी रिस्तेदार या खास व्यक्ति से मेंटेनेंस की मांग कर सकते हैं, जो कि आगे चलकर उनकी जायदात का वारिस होगा।

क्या है पूरा मामला 

दरअसल यह मामला मुंबई के अँधेरी स्थित एक बुजुर्ग निवासी का है, जिनकी पत्नी का देहांत वर्ष 2014 में हुआ था। जब पिछले साल उन्होंने फिर से शादी का मन बनाया तो, उनकी बेटे और बहू ने प्रॉपर्टी की मांग की। बुजुर्ग व्यक्ति से अँधेरी स्थित उनके फ्लैट में कुछ शेयर की मांग की गई। पारिवारिक जद्द्दोजहद में उलझे बुजुर्ग व्यक्ति ने शांति के लिए अँधेरी स्थित फ़्लैट का 50 प्रतिशत शेयर अपने बेटे के नाम पर कर दिया। हालाँकि इसके बावजूद बेटे और बहू ने बुजुर्ग व्यक्ति और उसकी दूसरी पत्नी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उन्हें जबरन अँधेरी फ़्लैट से बेदखल कर दिया गया। अपनों से हारे बाप ने उसके बाद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद कोर्ट ने उनके दिए गिफ्ट को कैंसिल कर दिया। पिता की याचिका को बेटे ने चुनौती दी, लेकिन बेटे की याचिका को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

प्राचीन भारत के गुरुकुलों व् विद्यालयों में मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, जैसे मन्त्रों का जाप का उच्चारण किया और करवाया जाता था। हालाँकि पाश्चात्य संस्कृति के तेजी से प्रभाव में आने और शहरीकरण के चलते ये चीजें जेहन से मिटती जा रही हैं। जिसके चलते परिवार में, समाज में, लोगों के बीच बड़े-छोटे की आदर्शता के निशाँ धूमिल हो चुके हैं। बच्चों द्वारा बुजुर्गों का अपमान आज आम बात हो गई है। 2001 की जनगणना के अनुसार, भारत में बुजुर्गों की संख्या 7.7 करोड़ थी, जो कि 2026 में 12.4 करोड़ होने की परिकल्पना है। हालाँकि बुजुर्गों को बेघर कर बेसहारा छोड़ने के वाकये बेहद हैं। इस समस्या पर भले ही कानून बनाया गया, लेकिन इस समस्या में कोई कमी नहीं आई। आज भी बुजुर्गों को बेघर कर सड़कों पर छोड़ दिया जा रहा है। आखिर गरीब और निरक्षर व्यक्ति अपना हक़ कहाँ मांगे। मुंबई उच्चन्यायालय के इस निणर्य ने ऐसे हज़ारों बुजुर्गों की आँखों में उम्मीद की किरण ज़रूर जगाई है।

मुंबई उच्चन्यायालय के इस फैसले की हर ओर सराहना की जा रही है। देशभर के लोग इस बाबत पर सोशल मीडिया पर अपने विचार प्रकट कर रहे हैं। बॉलीवुड भी इस फेहरिस्त में शामिल हो चुका है, यह ख़ुशी की बात है। जब लोग मिलकर बोलेंगे, आवाज़ तभी उठेगी। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अरसद वारसी ने मुंबई उच्चन्यायालय के इस फैसले को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सराहना की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “अगर यह बात सही है, तो एक लंबे समय के बाद एक बेहतर कानून पास हुआ।”

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कोलकाता नाइट राइडर्स ने अम्फान के संकट में बढ़ाया मदद का हाथ!

‘पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री राहत कोष’ : कोलकाता नाइट राइडर्स ने निधि में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध किया है।

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कोलकाता नाइट राइडर्स ने मीर फाउंडेशन के साथ मिलकर अम्फान के बाद की लड़ाई के लिए सरकार के मौजूदा प्रयासों का समर्थन करने के लिए कई पहल की घोषणा की है।

‘पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री राहत कोष’ : कोलकाता नाइट राइडर्स ने निधि में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध किया है।

‘केकेआर सहायता वाहन’ : चक्रवात ने कई लोगों को बेघर कर दिया है और मूलभूत आवश्यकताओं से रहित है, ऐसे में केकेआर सहायता वाहन पहल पश्चिम बंगाल के कई स्थानों पर विशेष रूप से उपग्रह शहरों / जिलों में प्रभावित लोगों को आवश्यक किट वितरित करने में मदद करेगी।

‘वृक्षारोपण’ : जूही चावला मेहता के नेतृत्व में केकेआर प्लांट ए 6 अभियान, कोलकाता में पेड़ लगाने में वर्षों से लगातार काम कर रहा है। केकेआर ने उन 5000 पेड़ों को रोपने और फिर से भरने की प्रतिज्ञा ली है, जिन्हें समय-समय पर चक्रवात से नुकसान पहुंचा है।

केकेआर के सीईओ और एमडी, वेंकी मैसूर ने इन पहलों की घोषणा करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल राज्य और कोलकाता शहर कई मायनों में हमारे लिए खास रहा है। कोलकाता और पश्चिम बंगाल के लोगों ने केकेआर को गले से लगाया है और वर्षों से अपना प्यार और समर्थन देते आये है। यह प्रभावित लोगों को थोड़ी राहत प्रदान करने के लिए हमारी ओर से एक छोटा सा प्रयास है।”

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रामायण 2008: क्रोधित भगवान लक्ष्मण के संवादों ने 200 क्रू सदस्यों को जोर से हसाया|

टेली टाउन में अपनी पहली भूमिका निभाते हुए, अंकित स्वाभाविक रूप से नर्वस थे !

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टेलीविजन उद्योग में अंकित अरोरा (लक्ष्मण) के लिए शुरुआती दिन थे। टेली टाउन में अपनी पहली भूमिका निभाते हुए, अंकित स्वाभाविक रूप से नर्वस थे क्योंकि अभिनय में उनकी पृष्ठभूमि नहीं थी और किस्मत के चलते उन्हें लक्ष्मण की भूमिका मिली |

हालांकि, प्रत्येक एपिसोड और दृश्य के लिए पृष्ठभूमि कहानियाँ हैं, लेकिन उनमें से एक जो अनोखी है जब अंकित अरोरा को अपना पहला बड़ा संवाद देना था, जो तीन पेज का एक एकालाप था। सीता के स्वयंवर के दौरान, राजा जनक (सीता के पिता) के पास भावी दूल्हे के लिए एक भारी धनुष चुनने का कार्य था। हर कोई विफल रहा और उन्होंने कहा कि किसी के पास भी (राम सहित) ऐसा करने के लिए ताकत नहीं है। लक्ष्मण का क्रोधित चरित्र यह सुनकर परेशान हो जाते हैं और उन्हें जनक के बयान पर सवाल उठाने का जवाब देना पड़ता है। इस बयान के कारण लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं और वह राजा से सवाल करना चाहते है |

उस घटना को याद करते हुए जो कल की तरह ताजा है, अंकित अरोरा ने कहा, “दृश्य में राजा जनक ने थोड़ा लंबा ब्रेक लिया और अपने संवाद को जारी रखने वाले थे, जब मुझे लगा कि 3 पेज के एकालाप को खत्म करने की मेरी बारी है। जैसे ही मैंने शुरू की, पूरी कास्ट और 200 लोगों के क्रू ने हँसना शुरू कर दिया और निर्देशक ने शॉट काट दिया । हंसी के लिए एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में मैं वास्तव में क्रोधित हो गया और सभी को चुप रहने के लिए कहा। अगले ही पल पिन ड्रॉप साइलेंस था। निर्देशक खुद एक क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति भी चुप रहे और मुझे दूसरे शॉट के लिए आग्रह किया| मैंने तब एक शॉट में 3 पेज का मोनोलॉग सुनाया। लक्ष्मण का किरदार जो एक गुस्सैल नौजवान है, वह भूमिका के बाद मेरा दूसरा स्वभाव बन गया। शो की शूटिंग समाप्त होने के बाद मैंने भूमिका से बाहर निकलने के बाद एक बार फिर शांत व्यक्ति बन गया। ”

हर शाम 7.30 बजे वादों और विचारधाराओं की महागाथा रामायण देखें, और 9.30 बजे टेलीकास्ट दोहराएं  दंगल TV  पर.

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आईएफटीपीसी और एफडब्ल्यूआईसीई ने शूटिंग शुरू करने को लेकर बैठक आयोजित की

फिल्म कामगारों के लिए 25 सूत्रीय गाइडलाइन पर प्रोडूसर्स सहमत

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मुंबई,फिल्म एन्ड टीवी प्रोडूसर्स काउन्सिल (टीवी एन्ड वेब विंग) आईएफटीपीसी और  फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) ने बुधवार को  एक वर्चुवल मीटिंग आयोजित कर फिल्म और टीवी धारावाहिको की शूटिंग फिर से शुरू किये जाने पर विचार विमर्श किया।बता दें कि कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के कारण 17  मार्च 2020 से फिल्म और टीवी धारावाहिकों की शूटिंग बंद है। इससे हजारों लोग बेरोजगार होकर बैठे हैं और राजस्व की क्षति हुई है। इसी के साथ  एफडब्ल्यूआईसीई ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को लेकर एक 25 सूत्रीय  गाइडलाइन अपने कामगारों के लिए तैयार किया है।मीटिंग में  इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रोडूसर्स इस गाइडलाइन के  सभी मुद्दों पर सहमत हुए हैं। इसमें कामगारों के लिए 50 लाख का  कोविड बिमा का भी समावेश है। प्रोड्यूसर्स बॉडी ने टेक्नीशियनों और कलाकारों के  ओवरड्यू भुगतानों को देने के लिए  एफडब्ल्यूआईसीई की मदद करने का भी वादा किया और कामगारों के पिछले बकाये का भुगतान करने का वादा किया है। आईएफटीपीसी ने एफडब्ल्यूआईसीई से डिफॉल्टरों की सूची जमा करने का अनुरोध किया।इस बैठक में फेडरेशन के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी ने कहा कि आईएफटीपीसी और एफडब्ल्यूआईसीई  का उद्देश्य शूटिंग को फिर से शुरू करना होगा।

आईएफटीपीसी की ओर से बैठक में जेडी मजेठिया, श्यामाशीष भट्टाचार्य, अभिमन्यु सिंह , नितिन वैद्य और एफडब्ल्यूआईसीई की ओर से प्रेसिडेंट बीएन तिवारी,जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे, ट्रेजरार गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव और मुख्य सलाहकार अशोक पंडित उपस्थित थे।

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