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फिल्म समीक्षा

‘ठाकरे’ के रूप में परदे पर छाए नवाज़

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महाराष्ट्र की शान बाल ठाकरे के जीवनी पर बनी फिल्म ठाकरे आज सिनेमा घरों में दस्तक दे चुकी है। भले ही सिनेमा घरों में दर्शक बाला साहेब ठाकरे की असल कहानी को जानने की उत्सुकता लेकर पहुंचे हो, लेकिन फिल्म में नवाज़ के अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। जी हाँ, इन दिनों नवाज़ ठाकरे के रूप में दर्शकों के बीच छाए हुए हैं। इस बात को तो खुद नवाज़ ने भी स्वीकारा है कि इस फिल्म में बाल ठाकरे की भूमिका निभाना उनके फ़िल्मी जीवन का सबसे कठिन कार्य था। हालाँकि किसी पात्र की भूमिका निभाना ही सबकुछ नहीं होता, बल्कि एक कलाकार को अपने अभिनय से उस पात्र में जान डालनी होती है। आज ठाकरे को देखने के बाद कम से कम इतना तो बेजिझक कह सकते हैं कि नवाज़ ने अपने अभिनय से बाला साहेब ठाकरे को परदे पर जीवंत कर दिखाया है।

अपने मराठा स्वभाव और लोगों के लिए जीने-मरने के जज्बे से परिपूर्ण बालासाहेब ठाकरे आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं। ठाकरे फिल्म उनके इसी जीवनी को परदे पर प्रदर्शित करती है। बालासाहेब ने किस प्रकार से शिव सेना गठित की और आगे चलकर महाराष्ट्र में शिव सेना राज को बताती हैं। यह फिल्म सिनेमा घर में दर्शकों के पलकों को किसी भी समय झपकने नहीं देती। ठाकरे के किरदार में नवाज़ का अंदाज़ दर्शकों को खूब भा रहा है। इस फिल्म में बालासाहेब की पत्नी मीना ठाकरे का किरदार अमृता राव ने निभाया है। नवाज़ के साथ फिल्म में उनके किरदार को भी खूब सराहा जा रहा है। इस फिल्म में सबसे ख़ास बाबरी मुद्दा रहा, जिसकी सुनवाई में बालासाहेब ठाकरे ने अपनी बात रखी। उनके निर्भीक और निडर व्यक्तित्व को परदे पर पूरी तरह उजागर करने की कोशिश की गई है।

वैसे तो इस फिल्म को वैचारिकता के आधार पर देखा जाए, तो सभी चीजें सही लगीं, लेकिन फिर भी कुछ ऐसी भी बातें रहीं, जो अगर और बेहतर होती तो कुछ और बात होती। फिल्म दूसरे हाफ में कहीं न कहीं थोड़ी धीमी पड़ती दिखाई देती है। जिस प्रकार से फिल्म का आगाज़ था, अंत वैसा नहीं हुआ। किसी भी पात्र के जीवन को ज्यों-का-त्यों मात्र दो घंटों की फिल्म के माध्यम से बताना असंभव सा ही है। ठाकरे फिल्म में ज़रूर कुछ अहम पहलुओं पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई, लेकिन इस बीच कुछ बातें छूट भी गई। फिल्म में यह भी नहीं बताया गया कि उन्होंने रुद्राक्ष माला कब से पहनना शुरू किया। लेकिन कुछ छोटी बातों को अगर नजरअंदाज कर दिया जाए, तो फिल्म बेहद शानदार है।

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